क्या आपने ये सभी जांचें करा लीं ?
संतान पाने की चाहत हर दंपती को होती है । विवाह के कुछ वर्ष बीत जाने के बाद परिवार से या दोस्तों से संतान उत्पत्त्ति के लिए प्रेशर आने लगते हैं । सभी संभावित उपाय आजमा चुकने के बाद दंपती फर्टिलिटी क्लिनिक की सेवाएं लेते हैं. लेकिन यहां पहुंचने से पहले उन्हें कुछ जरूरी टेस्ट करा लेना चाहिए । इससे यह पता चल सकेगा कि निसंतानता का क्या मेडिकल कारण है ।
गर्भाशय का इंफेक्शन मां नहीं बनने देगा
नए जीवन की उम्मीद किसी भी दंपती के जीवन का सबसे सुनहरा दौर होता है । अपनी गोद में खुद की संतान होना उन्हें पूर्णता की ओर ले जाता है, लेकिन कई दंपती सामान्य तरीके से गर्भधारण नहीं कर पाते हैं । इलाज के बारे में जानकारी नहीं होने पर पहले तो वे सामान्य इलाज करवाते हैं और सफलता नहीं मिलने पर इधर – उधर भटकते रहते हैं । दंपति किसी भी आईवीएफ सेंटर में इलाज शुरू करवाएं इससे पहले यह जानना जरूरी है कि निसंतानता का कारण क्या है । और दोनों में से कौन इसके लिए जिम्मेदार है ।
महिलाओं को ये जांचें जरूर कराना चाहिए 
फैलोपियन ट्यूब की जांच : प्राकृतिक गर्भधारण में फैलोपियन ट्यूब की सबसे अहत भूमिका होती है । भ्रूण बनने की प्रक्रिया फैलोपियन ट्यूब में होती है इसलिए ट्यूब का सही स्थिति में और सुचारू होना
आवश्यक होता है । ट्यूब में संक्रमण होने या किसी तरह का ब्लॉकेज होने पर गर्भधारण नहीं हो पाता है । महिलाओं में निसंतानता के जितने भी मामले सामने आते हैं ज्यादातर में ट्यूब में ब्लॉकेज या विकार की समस्या होती है । आईवीएफ उपचार शुरू करने से पहले महिला की ट्यूब की जांच की जाती है ।
सोनोग्राफी से अण्डों की जांच : अण्डाशय की स्थिति जानने के लिए अण्डाशय का सोनोग्राफी अल्ट्रासाउण्ड किया जाता है । अंडों की संख्या और गुणवत्ता को जानने के लिए माहवारी के पहले कुछ दिनों के दौरान रक्त में कुछ हॉर्मोन की मात्रा की जांच की जाती है, जिसमें फॉलीकल स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन, एन्ट्रल फॉलीकल काउण्ट और एंटीमुलेरियन हॉर्मोन शामिल हैं ।
गर्भाशय की जांच : आईवीएफ शुरू करने से पहले डॉक्टर गर्भाशय सही तरीके कार्य कर रहा है या नहीं ये जांचते हैं । गर्भाशय की सोनोग्राफ्री की जाती है, क्योंकि भ्रूण बनने के बाद उसे गर्भाशय में ही विकसित होकर जन्म लेना होता है ।
खून की जांच : महिला में फर्टिलिटी की अन्य जांचों के साथ रक्त की कुछ जांचें की जाती है जैसे जिसमें एचआईवी और अन्य संक्रमण, प्रोलेक्टिन, थायरॉयड आदि देखा जाता है । इन सभी जांचों अलावा अगर महिला की कोई मेडिकल हिस्ट्री रही हो तो उसे भी देखा जाता है ।

पुरुषों के टेस्ट
पुरुषों के लिए केवल वीर्य विश्लेषण ( सीमेन की जांच ) किया जाता है, जिसमें शुक्राणुओं की संख्या, गतिशीलता और आकार की जांच की जा सके । पुरुषों की तुलना में महिला के अधिक टेस्ट किए जाते हैं, क्योंकि गर्भधारण के लिए महिला में बहुत सारे अन्य कारक भी मायने रखते हैं । मरीज की स्थिति के अनुसार आईवीएफ के द्वारा गर्भधारण कराने के लिए ऊपर लिखे टेस्ट के अतिरिक्त भी टेस्ट करवाए जा सकते हैं ।





