किडनी फंक्शन 10 से कम होने पर प्रत्यारोपण जरूरी

क्रोनिक किडनी डिजीज से पीडित लोगों की आयु बढ़ाने और उनके जीवन को आसान बनाने का अंतिम विकल्प प्रत्यारोपण ही है। किडनी फंक्शन यानी ग्लोमेरूलर फिल्टरेशन रेट दस से कम होने पर किडनी प्रत्यारोपण किया जाता है। हालांकि, किडनी ट्रांसप्लांट के बाद परहेज करने पर भी कैंसर और संक्रमण का खतरा दस गुना तक बढ़ जाता है। अब तक 50 से अधिक किडनी प्रत्यारोपण कर चुके एमसीएच यूरोलॉजी डॉ. गौरव मिश्र ने बताया कि सर्जरी के बाद रोगी को हाइजीन का काफी ध्यान रखना होता है। साथ ही सभी प्रकार के नशे और जंक फूड का सेवन नहीं करना चाहिए। दर्द निवारक कोई भी दवा या एंटीबायोटिक बिना अपने चिकित्सक के परामर्श के कतई नहीं लें पेशाब करने में कोई  दिक्कत जैसे बार – बार  यूरीन जाना पड़े,सांस लेने में दिक्कत हो या कहीं छोटा सा भी घाव हो तो उसकी जांच अवश्य कराएं। नियमित व्यायाम और प्रदूषण रहित परिवेश में रहना संक्रमण के खतरे को कम करता है। डॉ. गौरव के अनुसार प्रत्यारोपण के पहले किडनी देने वाले की क्रास मैचिंग करा कर पहले यह देखा जाता है कि वह सही ढंग से काम करेगी कि नहीं? प्रत्यारोपण के पहले रोगी का बीपी और शुगर नियंत्रिंत होना जरूरी है। साथ  ही डोनर को पथरी, कैंसर या कोई अन्य आनुवंशिक बीमारी तो नहीं है, इसकी भी जांच की जाती है।

गर्मियों में रखें अपनी किडनी की खास ख्यालनिवारकलकोई

पटना में यहां है इलाज की व्यवस्था 

स्वायत्तशासी संस्थान इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान ( आइजीआईएमएस ) और निजी क्षेत्र में पारस एमआरआई हॉस्पिटल में ही अभी किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा है। वहीं सरकारी अस्पतालों में प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान पीएमसीएच में जुलाई से इसका उपचार शुरू हो सकता है।

  • प्रत्यारोपण  के बाद नियमित रूप से जांव करा रहें डॉक्टर के संपर्क  मेंि
  • मास्क और हाथों को साफ रखने से संक्रमण की आशंका हो जाती है कम

इतना आता है खर्च 

12 लाख रुपये निजी अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण का आता खर्च

2.5  लाख रुपये वार्षिक खर्च आता है डायलिसिस कराने पर

03 लाख के करीब सरकारी  अस्पताल में प्रत्यारोपण का खर्च