गर्भाशय के संक्रमण की पहचान और उपचार
हीपीआईडी की समस्या के कुछ लक्षण नजर आते हो इसके बावजूद इसका पता लगाने के लिए किसी प्रकार की जांच प्रक्रिया उपलब्ध नहीं है, मरीज से बातचीत के जरीए और लक्षणों के आधार पर ही डॉक्टर इस की पुष्टि करते हैं । डॉक्टर को किस प्रकार के बैक्टिरिया के कारण पीआईडी की समस्या हो रही है इसके लिए क्लेमाइडिया या गनोरिया की जांच की जाती है । फेलोपियन ट्यूब में इंफेक्शन का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है पीआईडी का इलाज एंटीबायोटिकद्वारा किया जरूरी होता है । टीबी के कारण सीआईडी की समस्या होने पर एंटीटीबी ट्रीटमेंट किया जाता है वैसे टीबी के इलाज के बाद पीआईडी का उपचार किया जा सकता है, यदि इलाज के बाद भी मरीज की स्थिति में सुधार नहीं होता है तो सर्जरी की सलाह दी जाती है ।
गर्भाशय का इंफेक्शन मां नहीं बनने देगा
विशेषज्ञों का कहना है कि चुंकि हर बार पीआईडी होने का गर्भाशय का इंफेक्शन मां नहीं बनने देगा कारण एसबीआई नहीं होता है, इसलिए हर बार इससे बचाव संभव नहीं, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रख कर इसके होने के खतरे को कम जरूर किया जा सकता है ।
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जिस महिलाओं के पीआईडी के बाद प्रजनन अंग क्षतिग्रस्त हो गए हों, उन्हें फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए ताकि सेहतमंद गर्भावस्था को बनाए रखा जा सके । पेल्विक इंफेक्शन के कारण गर्भाशय के बाहर प्रेग्नेंट होने का खतरा 6 – 7 गुना तक बढ़ जाता है इसके खतरे को दूर करने और फैलोपियन ट्यूब में समस्या होने पर क्या आईवीएफ थेरेपी करने की सलाह दी जाती है क्योंकि आईवीएफ के जरिए यूट्यूब को पूरी तरह से पार किया जा सकता है फैलोपियन ट्यूब में किसी प्रकार का अपराध होने की स्थिति में रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी ट्रीटमेंट की सलाह दी जाती है ।
गर्भावस्था के दौरान यदि सीआईडी की समस्या फिर से हो जाती है ऐसे में डॉक्टर साहब की जरूरत होती है ताकि आईवीएफ द्वारा एंटीबायोटिक दिया तकनीक से सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है ।





