दिल को बचा लें सिगरेट छोड़ दें

दिल की बीमारियों से मरने वालों में अधिकांश मरीज धूम्रपान के शौकीन भी पाए जाते हैं। जो लोग एकदम से धूम्रपान छोड़ देते हैं उनके दिल के रोगों से मरने का जोखिम भी कम हो जाता है।धूम्रपान से हुए नुकसान की भरपाई शरीर तत्काल शुरू कर देता है। 

दिल की बीमारी के जोखिम पर हैं भारतीय युवा

तंबाकू में 4 हजार से भी अधिक जहरीले रसायन होते हैं और उनमें से 18 कैंसर कारक होते हैं। धूम्रपान करने वाले ऑक्सीजन का नहीं बल्कि कार्बन मोनोऑक्साइड का कश लगाते हैं। फेफड़ों से प्रोसेस होकर कार्बन मोनोऑक्साइड ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर  देती है। इसी के कारण रक्होत तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन की मात्रा भी कम हो जाती है।

कम मिलता है ऑक्सीजन

शरीर को सदा क्रियाशील बने रहने के लिए रक्त के साथ भरपूर ऑक्सीजन मिलना चाहिए। धूम्रपान करने वालों के शरीर के ऊतक ऑक्सीजन की कमी भुगतते हैं। दिल, फेफड़े, मस्तिष्क एवं अन्य महत्वपूर्ण अवयवों को ऑक्सीजन से भरा हुआ खून लगातार मिलते रहना चाहिए। ऑक्सीजन की कमी के कारण दिल की धड़कन एवं उसकी लय पर बुरा असर पड़ता है। यह वजह है कि धूम्रपान करने वालों को दिल के दौरे, हाई ब्लड प्रेशर, खून के थक्के बनना, खून का रिसाव होने लगना  तथा दिल की अन्य बीमारियां हो जाती हैं। धूम्रपान दिल की बीमारी का जोखिम तीन गुना बढ़ा देता है।

सख्त हो जाती हैं खून की नलियां

धूम्रपान करने से खून की नलियां सख्त हो जाती हैं। उनका लचीलापन खत्म हो जाता है। इससे जब भी दिल का दौरा पड़ता है तो सख्त नलियां प्रेशर सहन नही कर पाती हैं और फट जाती हैं, जिससे मृत्यु तक हो जाती है। इससे खून के थक्के के अलावा गुड कोलेस्ट्रॉल के स्तर में भी कमी आ जाती है। ट्रायग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ जाता है। खून की नलियों की अंदरूनी सतह नष्ट होने लगती है।

घर के सदस्यों का रखें खयाल

धूम्रपान करने वाला खुद के दिल की सेहत से तो खिलवाड़ करता ही है लेकिन घर के सदस्यों के स्वास्थ्य को भी सूली पर टांग देता है। सेकंड हैंड स्मोकिंग करने वालों को भी दिल की बीमारियों का उतना ही जोखिम रहता है जितना खुद धूम्रपान करने वालों को होता है। घर के सदस्य यह सोच लें कि हम तो नहीं पीते हैं इसलिए हमें धूम्रपान का बुरा असर नहीं होगा तो वे भ्रम में होते हैं। सेकंड हैंड स्मोकिंग करने वाले धूम्रपान करने वालों से थोड़ी दूर हैं, लेकिन वे धूम्रपान से उठने वाले धुएं और फेफड़ों से छोड़े गए कार्बन मोनोऑक्साइड दोनों के सीधे संपर्क में आ जाते हैं। इसलिए उन्हें भी धूम्रपान करने वालों जितना ही जोखिम रहता है।

दमखम समाप्त हो जाता है

जो लोग धूम्रपान तो नहीं करते हैं, लेकिन धूम्रपान करने वालों के सीधे संपर्क में लंबे समय तक रहते हैं उनके फेफड़ों में ऑक्सीजन भरने की क्षमता कम हो जाती है। यही वजह है कि उनका दमखम समाप्त हो जाता है और वे मेहनत का कोई काम नहीं कर पाते हैं। उनकी खून की नलियां क्षतिग्रस्त होने लगती हैं।

सिगरेट छोड़ते ही मौत से दूरी तय

सिगरेट या तंबाकू कभी भी धीरे- धीरे करके नहीं छोड़ी जा सकती है। एकाएक तथा तत्काल प्रभाव से सिगरेट छोड़ें और फिर चाहे कुछ भी हो जाए पलटकर न देखें। आपके ऐसा करते ही मौत दूर भागने लगेगी। धूम्रपान छोड़ते ही हैमरेज और दिल का दौर पड़ने की आशंका कम हो जाती है। इसलिए एकदम से धूम्रपान बंद कर दें। आपके और घर के सदस्यों के दिल के भले के लिए इतना तो कर ही सकते हैं।